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लोकसभा से पारित हुआ परीक्षा पेपर लीक रोकथाम संशोधन विधेयक 2026, अब नकल माफिया की खैर नहीं!

प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम, पेपर लीक मामलों पर होगी कड़ी कार्रवाई

बोध नेटवर्क्स डेस्क 30 जुल॰
लोकसभा से पारित हुआ परीक्षा पेपर लीक रोकथाम संशोधन विधेयक 2026, अब नकल माफिया की खैर नहीं!

नई दिल्ली | 30 जुलाई 2026

देशभर में भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और संगठित नकल के मामलों पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लोकसभा ने 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' (Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026) को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और युवाओं का भरोसा बहाल करना है।

यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन करता है। इसे केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में पेश किया था।

क्या है इस विधेयक का उद्देश्य?

हाल के वर्षों में NEET, भर्ती परीक्षाओं और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों को प्रभावित किया। सरकार का कहना है कि संगठित गिरोहों और परीक्षा प्रक्रिया में शामिल भ्रष्ट नेटवर्क पर कड़ी कानूनी कार्रवाई के लिए मौजूदा कानून को और सख्त बनाना आवश्यक था।

विधेयक की प्रमुख बातें

1. सजा और जुर्माने में बड़ा इजाफा

संशोधन के तहत पेपर लीक और अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए जेल और जुर्माने दोनों को काफी बढ़ाया गया है।

व्यक्तिगत अपराधियों के लिए 5 से 10 वर्ष तक की सजा और 50 लाख रुपये तक जुर्माना।

संगठित अपराध में शामिल गिरोहों के लिए कम से कम 7 वर्ष की सजा और न्यूनतम 10 करोड़ रुपये का जुर्माना।

परीक्षा आयोजित करने वाली सेवा प्रदाता एजेंसियों पर 5 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।

2. स्पेशल टास्क फोर्स का गठन

पेपर लीक और परीक्षा धोखाधड़ी की जांच के लिए केंद्र सरकार स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित कर सकेगी। यह विशेष टीम ऐसे मामलों की जांच निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी करेगी।

3. दो महीने में जांच पूरी करने का लक्ष्य

विधेयक में प्रावधान किया गया है कि ऐसे मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रयास किया जाएगा ताकि लंबी जांच के कारण न्याय में देरी न हो।

4. फास्ट-ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई

हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट नामित किए जाएंगे। चार्जशीट दाखिल होने के बाद मुकदमे का निपटारा तीन महीने के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है।

5. दोषी एजेंसियों पर लंबा प्रतिबंध

यदि कोई सेवा प्रदाता संस्था परीक्षा में गड़बड़ी या पेपर लीक में दोषी पाई जाती है, तो उसे सार्वजनिक परीक्षाओं के आयोजन से आठ वर्ष तक प्रतिबंधित किया जा सकेगा। पहले यह अवधि चार वर्ष थी।

किन परीक्षाओं पर लागू होगा कानून?

यह कानून केंद्र सरकार द्वारा आयोजित या अधिसूचित प्रमुख सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होगा, जिनमें शामिल हैं—

UPSC

SSC

रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB)

IBPS

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA)

NEET

JEE

CUET

केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य सार्वजनिक परीक्षाएं।

सरकार का पक्ष

सरकार का कहना है कि यह संशोधन लाखों छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए लाया गया है। उसका दावा है कि कड़ी सजा, समयबद्ध जांच और फास्ट-ट्रैक अदालतों के माध्यम से पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

विपक्ष और छात्रों की प्रतिक्रिया

विधेयक पर संसद में चर्चा के दौरान विपक्ष ने परीक्षा प्रणाली की खामियों और छात्रों के हालिया आंदोलनों का मुद्दा उठाया। वहीं कई छात्र संगठनों ने कानून को सकारात्मक कदम बताते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया है.

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